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वैज्ञानिक - श्री नबी नारायण जी

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जरा कल्पना किजीऐ... आपने अपनी पुरी जवानी देश को महत्वपुर्ण तकनीक देने में लगा दी हैं और जब आप की सेवा के मात्र 15 वर्ष बचे हो तब आप खुद को हथकडीयों में बधा हुआ नग्न अवस्था में एक ऐसे बन्द कमरे में पाये जहाँ सिर्फ चार पुलिस कर्मी हो और कुछ नहीं ये कहानी नबी नरायण कि हैं ये भारत के रोकेट वैज्ञानिक थें और सबसे बडी बात ये है कि जिस समय इन्हे नगां कर के पुलिस कस्टडी में पीटा जा रहा था तब ये भारत को एक बडी महत्वपुर्ण और जटिल तकनिक देने की दहलीज पर थें नवी नारायण को धमकी दी जा रही थी कि अगर उन्होंने पुलिस द्वारा कहे जाने वाली बातें नहीं मानी तो उनको जम्मू-कश्मीर ले जाकर पहाड़ से गिरा दिया जाएगा जिस समय नवीन नारायण को प्यास लगती थी तो उनसे सिर्फ 1 मीटर दूर पानी की ठंडी बोतल रखी जाती थी नबी नारायण जी को बांधकर रखा जाता था और उनकी हाथ उस बोतल तक नहीं पहुंच पाते थे लेकिन बड़ी बात यह पता करना है कि उनके साथ ऐसा हुआ क्यों था और क्या कारण थे कि एक भारतीय वैज्ञानिक जो इतनी महत्वपूर्ण कार्य में लगा हुआ था उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया. यह उस समय की बात है जब भारत अपना खुद का एक शक्तिशाली र...

वो याद आती है....!

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मैं सहेज कर रखूँगा सर्वदा उन पलों को जब आखिरी बार उसने अपने पूरेपन से समेट लिया था अपने में मुझे और दूर कहीं हमारे मिलन की खुशी में चहचहाने लगी थी चिड़ियाएं ऐसा नहीं है कि मैं भूलने की कोशिश नहीं करता हूँ उसे भूलने की उत्कट कोशिश करता हूँ पर भूल कहाँ पाता हूँ उसे इस असफल कोशिश में वह और भी उत्कटता से याद आती है मुझे ✍रुद्र तश्वीर-: गूगल से लिया गया

भारतीय मंदिरों के बारे में हैरान करने वाले कुछ रोचक तथ्य क्या हैं?

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भारतीय मंदिरों के बारे में हैरान करने वाले कुछ रोचक तथ्य- मुझे लगता है कि हमारे पूर्वजों के पास रॉक पिघलने या रॉक सॉफ्टनिंग तकनीक के समान कुछ था। नीचे कुछ घटनाएं दी गई हैं जिन्हें आधुनिक विज्ञान भी नहीं समझा सकता। हालांकि प्रत्येक भारतीय प्राचीन हिंदू मंदिर अपने आप में कई तरह के शोध पत्रों में है। मैं बहुत ही अजीब पत्थर संरचनाओं को दिखाऊंगा जिसे आधुनिक तकनीक द्वारा भी समझाया नहीं जा सकता है। यहाँ पहला सबूत है। यहां एक शेर की मूर्ति का एक चित्र है, जिसके मुंह के अंदर एक पत्थर की गेंद है। पत्थर की गेंद को बाहर नहीं निकाला जा सकता है। यह असंभव नहीं है। लेकिन मुख्य समस्या यह है कि पत्थर की गेंद मूर्ति को तराशने में प्रयुक्त मूल चट्टान की तुलना में अलग पत्थर की है। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे चट्टान को पिघलाए बिना इसे बनाया जा सके। दूसरा प्रमाण उपरोक्त तस्वीर हम्पी में संगीत मंदिर की है। मूल रूप से एक ही चट्टान से 7 स्तंभ उकेरे गए थे और एक ही लंबाई और व्यास के बावजूद, वे सभी अलग-अलग ध्वनि उत्पन्न करते हैं (सा रे गा मा पा दे नी सा)। ब्रिटिश लोग इस घटना पर ...

चलो कोई वजह ढूँढते हैं!

चलो हसने की कोई वजह ढूंढते हैं, जिधर ना हो कोई गम ऐसी जगह ढूंढते हैं! बहुत भटक लिए ज़िन्दगी के दौड़ में, कहीं सुकून से बैठने की जगह ढूंढते हैं! मतलबी लोगों के बीच, कोई साथ चलने वाला हमसफ़र ढूंढते हैं! अनजान सी गलियो में कहीं, मंज़िल को पाने का रास्ता ढूढते हैं! दूर हुए दोस्तों के साथ, मुलाकात करने की वजह ढूंढते हैं! किसी अनजान की मदद कर, उसके मुस्कुराने की वजह ढूंढते हैं! बहुत उड़ लिए आसमान में, चलो कहीं जमीन पर सतह ढूंढते हैं! रात के अंधेरों में, चांद की रोशनी ढूंढते हैं! जीने की कशमकश में, खुशियों की लहर ढूढते है! वीडियो कॉल के जमाने में, अपने से मिलने की कोई वज़ह ढूंढते हैं! ऑनलाइन खाना मंगा के खाने के चलन में, कभी खुद बनाने का मौका ढूंढते हैं! खुद की ख्वाहिश को पीछे रख, कभी मां बाप की खुशियों की वजह ढूंढते हैं! मन की उलझनों से उभरकर, चलो कहीं चैन से रहने की जगह ढूंढते हैं! बहुत वक्त गुजर गया भटकते हुए अंधेरों में, चलो इस अंधेरी रात की हम सुबह ढूंढते हैं

रिश्ता

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रिश्ता  प्रेम में डूबे पुरुष थोड़ा सुलझकर सिमट जाते हैं। प्रेम में डूबी स्त्री खोल देती है अपनी सारी गिरहें। स्त्री कैलेण्डर समेट लेती है सारी मुलाक़ातें अधूरी-पूरी बातें,  पहला स्पर्श , चुंबन और आलिंगन,  धड़कनों की रफ़्तार सांसों का स्पंदन। पुरुष को याद रहता है सिर्फ़ वो नाम और उसकी अधरों पर मचलकर खिलती मुस्कान। पुरुष अपने अधूरे अरमान तकियों को सुनाते हैं दीवारों को देखकर मुस्कुराते हैं गर्म चाय ठंडी पी जाते हैं। स्त्री करती है चांद से बातें देखती है इंद्रधनुषी सपने उंगलियों से लिखती है ख़त आसमान पर। स्त्री प्रेम में निखर जाती है जैसे सूरज की लालिमा छनकर आ गयी हो उसके कपोलों पर। पुरुष घंटों गुज़ार देते हैं आईने के सामने समझते हुए चेहरे की रोशनी का गणित।दस बार तह करते हैं वही कपड़े ख़्याल रखते हैं सिलवटों का। स्त्री का कमरा हो जाता है मीना बाज़ार अब वो ठीक करती है सिर्फ़ वही सिलवटें जिन्हें वह चूमकर मिटा सके पुरुष के माथे से।

जिंदगी यूँ चल तो रही है

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बहोत ज्यादा डगमगाते हुए संभल तो रही है ज़िन्दगी यूँ चल तो रही है रास्ते जाने अनजान ही सही बदल तो रही है ज़िन्दगी यूँ चल तो रही है हज़ारों ख्वाहिशें पूरी ना हुई नई पल तो रही है ज़िन्दगी यूँ चल तो रही है दुख है, दर्द है, तकलीफ़े भी है खुशियाँ मचल तो रही है ज़िन्दगी यूँ चल तो रही है मेरे जैसो की कमी नहीं है यहाँ बात ये खल तो रही है ज़िन्दगी यूँ चल तो रही है रोज़ नई सी आश लिए होता हूँ मगर बकवास चल तो रही है ज़िन्दगी यूँ चल तो रही है |

पता नही क्यूँ हूँ!

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यूँ हूँ  क्यूँ हूँ  नहीं पता क्यूँ हूँ  मरा हूँ  खरा हूँ  गले तक भरा हूँ  मन हूँ  तन हूँ  बेपरवाह मगन हूँ  दर्द हूँ  चुभन हूँ  मैं अकेलापन हूँ  यूँ हूँ  क्यूँ हूँ  नहीं पता क्यूँ हूँ