वैज्ञानिक - श्री नबी नारायण जी
जरा कल्पना किजीऐ... आपने अपनी पुरी जवानी देश को महत्वपुर्ण तकनीक देने में लगा दी हैं और जब आप की सेवा के मात्र 15 वर्ष बचे हो तब आप खुद को हथकडीयों में बधा हुआ नग्न अवस्था में एक ऐसे बन्द कमरे में पाये जहाँ सिर्फ चार पुलिस कर्मी हो और कुछ नहीं
ये कहानी नबी नरायण कि हैं ये भारत के रोकेट वैज्ञानिक थें और सबसे बडी बात ये है कि जिस समय इन्हे नगां कर के पुलिस कस्टडी में पीटा जा रहा था तब ये भारत को एक बडी महत्वपुर्ण और जटिल तकनिक देने की दहलीज पर थें
नवी नारायण को धमकी दी जा रही थी कि अगर उन्होंने पुलिस द्वारा कहे जाने वाली बातें नहीं मानी तो उनको जम्मू-कश्मीर ले जाकर पहाड़ से गिरा दिया जाएगा जिस समय नवीन नारायण को प्यास लगती थी तो उनसे सिर्फ 1 मीटर दूर पानी की ठंडी बोतल रखी जाती थी नबी नारायण जी को बांधकर रखा जाता था और उनकी हाथ उस बोतल तक नहीं पहुंच पाते थे
लेकिन बड़ी बात यह पता करना है कि उनके साथ ऐसा हुआ क्यों था और क्या कारण थे कि एक भारतीय वैज्ञानिक जो इतनी महत्वपूर्ण कार्य में लगा हुआ था उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया.
यह उस समय की बात है जब भारत अपना खुद का एक शक्तिशाली रॉकेट बनाना चाहता था भारत के पास एसएलवी और पीएसएलवी जैसे रॉकेट थे, यह रॉकेट इतनी मजबूत नहीं थे कि धरती की ऊपरी कक्षा में किसी सेटेलाइट को स्थापित कर पाए इसके लिए भारत को एक शक्तिशाली रॉकेट चाहिए था और उस रॉकेट बनाने के लिए भारत को क्रायोजेनिक तकनीक बनानी थी इस शक्तिशाली रॉकेट क्रायोजेनिक तकनीक से ही इतनी ऊंचाई तक जा पाते हैं
भारत के पास दो विकल्प थे
पहला विकल्प था जो रूस सहायता लेना
दूसरा विकल्प था अमेरिका की नासा से सहायता लेना
उस समय अमेरिका पाकिस्तान का एक घनिष्ठ मित्र था वह भारत को ऐसी कोई भी तकनीक ना देता जिसका उपयोग भारत अपनी सेना को मजबूत बनाने के लिए कर सकता था इसलिए 1990 में भारत ने रूस से सहायता मांगी, रूस भारत को क्रायोजेनिक इंजन और तकनीक देने के लिए राजी था
लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत पर इतनी है अत्याधुनिक तकनीक आ जाए जिसका उपयोग भारत पाकिस्तान के विरुद्ध कर सकें अमेरिका ने कहा कि यदि रूस भारत को तकनीक दे देता है तब भारत और रूस दोनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. उस समय जापान चीन फ्रांस इन देशों ने भी भारत को क्रायोजेनिक तकनीक दिए जाने का विरोध किया था
रूस को अपना फैसला बदलना पड़ा और भारत को तकनीक देने से रूस ने इंकार कर दिया तकनीकी जगह रूस ने भारत को 5 क्रायोजेनिक इंजन दिए भारत में इन इंजन का उपयोग अपने जीएसएलवी रॉकेट में किया जिसमें से सिर्फ तीन ही कामयाब हो पाए भारत के वैज्ञानिकों ने अपने इस अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए यह तय किया कि भारत अपना खुद का क्रायोजेनिक इंजन बनाएगा.
क्रायोजेनिक इंजन की तकनीक बहुत ही मुश्किल तकनीक है क्योंकि इसमें सर्दी और गर्मी दोनों का एक साथ संतुलन बिठाना होता है इसके बारे में फिर कभी बात की जाएगी जब भारत ने क्रायोजेनिक इंजन बनाना शुरू किया तो उस समय नबी नारायण बहुत महत्वपूर्ण भूमिका में थे जब 1994 में उन्हें गिरफ्तार किया गया वे बेहद करीब थे क्रायोजेनिक इंजन बनाने के अचानक से पुलिस नबी के पास आई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया पूछने पर बताया गया कि नबी नारायण पर ये आरोप है कि उन्होंने भारत के क्रायोजेनिक इंजन की ड्राइंग पाकिस्तान को भेज दी है जिसमें मालदीव की एक औरत की सहायता ली गई है
नबी नारायण को हिरासत में रखा गया, नवी नारायण बड़े पढ़े-लिखे परिवार में पैदा हुए थे उनके पिता ने कभी उन पर हाथ नहीं उठाया लेकिन पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा जब नबी ने पुलिस को बताया कि
यह ड्राइंग बड़ी आसानी से एयरोडायनेमिक्स की पुस्तकों में उपलब्ध है तो पुलिस को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं है
नबी नारायण कहा करते थे पुलिस से की
निश्चित रूप से आपको रॉकेट तकनीक के बारे में कुछ नहीं पता क्योंकि जिस ड्राइंग बात कर रहे हैं यह ड्राइंग किसी भी किताब में बड़ी आसानी से मिल जाएगी और अगर मैंने पाकिस्तान को डूइंग बेच भी दी है तो सिर्फ इन ड्रॉइंग का उपयोग कर कोई भी राकेट नहीं बनाया जा सकता भारत पर के पास 1970 से यह ड्राइंग मौजूद है लेकिन हम आज भी अपना इंजन नहीं बना सके पाकिस्तान को इस ड्राइंग के साथ इंजन बनाने में 20 साल लग जाएंगे
लेकिन सुनता कौन जो भी पुलिस वाले थे वह सब विज्ञान का एक अक्षर भी नहीं समझते थे एक इतने बड़े वैज्ञानिक को जो भारत के लिए दिन रात एक किए थे उसको पुलिस के सामने ही निर्वस्त्र कर दिया गया.
उन पर तरह तरह कि आरोप लगाए गए, उनके परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई और कहां गया कि जम्मू कश्मीर ले जाकर कहीं पर भी पहाड़ से गिरा दिया जाएगा नवी नारायण इस पूछताछ के दौरान कई बार बेहोश हो जाते थे नवी नारायण को सीट पर भी नहीं बैठ्या जाता उनकी हाथ बांधकर उन्हें सिर्फ लटका दिया जाता था ये सब लगभग 20 25 दिन तक चला
भारत की छवि पूरी दुनिया में धूमिल हो गई कभी किसी ने यह नहीं पूछा कि क्या वास्तव में ड्राइंग बेचे गई थी नारायण पर मुकदमा चला गया और जब मुकदमा खत्म हुआ की तब पता चला कि अमेरिकन सरकार ने केरल सरकार के साथ मिलकर यह पूरा षड्यंत्र भारत को क्रायोजेनिक तकनीक तक पहुंचने से रोकने के लिए बनाया गया था
उस समय केरल में जो सरकार थी उसमें अनेक ऐसे नेता थे जिन्हें अमेरिका से ईसाई मशीनरी के नाम पर फंडिंग मिलती थी अमेरिकन सरकार ने इन्हीं लोगों का उपयोग पुलिस को नियंत्रित करने के लिए किया और पुलिस कोई आदेश दिया गया कि नारायण को पकड़कर रखा जाए.
नवी नारायण का एक लंबा समय इस जांच पड़ताल में ही चला गया कि दोषी है तो नहीं?
जो तकनीक मात्र 2 साल में बनाने वाले थे उस तकनीक को हासिल करने में भारत को 17 साल लग गए नवी नारायण तब तक इसरो को ज्वाइन नहीं कर पाए जब तक अदालत ने उन्हें बरी नहीं कर दिया जिस समय अदालत ने उन्हें बरी किया वे 60 से अधिक वर्ष के हो गए थे.
आज भारत ने 2019 में अपना चंद्र अभियान पर भेजा था यदि नवी नारायण के साथ इस तरह की हरकत ना हुई होती तो भारत 2000 में ही इस तरह के अभियान चांद पर भेज चुका होता और चीन से कोसों आगे होता.
नवी नारायण की घटना उदाहरण है कि कैसे कुछ भ्रष्ट लोग मिलकर एक ईमानदार और देशभक्त आदमी की पूरा जीवन बर्बाद कर सकते हैं
SOURCE:
BOOK READY TO FIRE BY NABI NARAYAN