रिक्शावाला
#रिक्शावाला
ओ..
रिक्शा वाले!राजू जोर से चिल्लाया आधे घंटे से खडे हर रिक्शेवाले को रोक रहा था।
कारण मेट्रो स्टेशन से घरतक 30 रु लगते ओर तकरीबन हर रिक्शेवाला 50 मांग रहा था।
जो भी रिक्शा रोकता राजू वही 30 देने को कहता मगर रिक्शावाला आखिर 40 तआता मगर आज राजू भी ठान चुका था वो 30से एक रु फालतू नही देगा मगर इसी जिद के चलते बहुत रिक्शेवाले आगे बढ जाते।
अचानक उसे एक रिक्शा दिखा ओए रिक्शा ..जोर से आवाज दी उसने और आँखों में चमक आ गई रिक्शा उसकी ओर ही आ रहा था एक दुबला पतला सा बूढ़ा मैली कुचैली कमीज पहने आ खड़ा हुआ -कहा चलना है बाबूजी, राजू राजापुरी चलना है चलोगे , हां बाबूजी काहे नहीं चलेंगे कितना लोगे राजू ने पुराना सवाल दागा।
रिक्शे वाले ने कहा - अरे साहब जो होता हो दे दीजिएगा राजू नेे झट बैग रिक्शे पर रखा रूमाल से पसीना पोछा और धम से बैठ गया रिक्शे पर रिक्शेवाला धीरे-धीरे पैडल मारने लगा रिक्शा धीमी रफ्तार से बढ़ने लगा।
आराम से बैठे राजू सोच रहा था पिछली बार 25 रू ही तो किराए के देता था
तीन महीने में 5 रु थोड़े बढ़ जाएगा 25 रूपए ही दूंगा उसने ऊपर की जेब में हाथ डाला मेट्रो वाले ने कुछ पैसे लौटाए थे उसने निकाला 50 की एक मुड़ी सी नोट के साथ दस रूपए के दो, तीन सिक्के भी निकल आए ।
दूंगा तो 25रु ही इन सबका दिमाग बहुत खराब हो गया है मनमाने पैसे मांगते हैं साले ..
मन मे बडबडाने लगा रिक्शा धीरे-धीरे बढ़ रहा था उसने खीझ उतारी - अरे !
थोड़ा तेज चलो भाई वैसे ही इतनी देर हो गई रिक्शेवाले वाले ने थोड़ी रफ्तार तेज की राजू ने यूंही पूछा क्यों इस उम्र में रिक्शा चलाते हो भाई।
रिक्शा वाला बोला - साहब ! क्या करूं जवान बेटा चल बसा घर तो चलाना ही है राजूको लगा पक्का झूठ बोल रहा है
अचानक उसकी नजर रिक्शे वाले के पैर पर पड़ी।
पैर सूजा हुआ था पट्टी पर खून रिस रहा था पर वह पैडिल मारने का पूरी ताकत से जोर लगा रहा था
राजू के हाथ में अभी भी 50 की नोट व सिक्के भिचे हुए थे अरे तुम्हारे पैर में तो घाव है फिर भी रिक्शा चला रहे हो..!!.
बूढा रिक्शा चलाते बोला -बाबूजी रिक्शा पैर से नही पेट से चलता है अकेले सहारा है पत्नी ओर बेटी के हांफते बोला ,राजू तुरंत रिक्शा से उतर गया ओर बोला -बाबा पहले पसीना पोछ लो ओर मुठ्ठी बंद सभी पैसे देते आगे बढने लगा ,रिक्शे वाला-अरे बाबूजी आपने गलती से बहुत ज्यादा पैसे दे दिए ओर अभी तो राजापुरी भी नही आया ओर आप उतर गये ,राजू-बाबा कुछ खा लेना ओर मरहम पट्टी करवा लेना मे चला जाऊंगा।
कहकर चलने लगा मगर कानों मे अभी भी आवाज आ रही थी बाबूजी रिक्शा पैर से नही पेट से ...
आज समझ आ रहा था पांचों अंगुली बराबर नही होती और हर इंसान बेइमान नही होता वरना बुजुर्ग शरीर यूं हट्टे कट्टे इंसानों को नही ढोता कहानियां
