संदेश
बेटी की चाह
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
बेटी की चाह . 40-42 साल की परिपक्व घरेलू स्त्री थी सुधा. भरापूरा परिवार था. धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी. सुधा भी ख़ुश ही थी अपने घर-संसार में, लेकिन कभी-कभी अचानक बेचैन हो उठती. इसका कारण वह ख़ुद भी नहीं जानती थी. पति उससे हमेशा पूछते कि उसे क्या परेशानी है? पर वह इस बात का कोई उत्तर न दे पाती. तीनों ही बच्चे बड़े हो गए थे. सबसे बड़ा बेटा इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष में, मंझला पहले वर्ष में और छोटा दसवीं में था. तीनों ही किशोरावस्था में थे. अब उनके रुचि के विषय अपने पिता के विचारों से ज़्यादा मेल खाते. वे ज़्यादातर समय अपने पिता, टीवी और दोस्तों के साथ बिताते. सुधा चाहती थी कि उसके तीनों बेटे उसके साथ कुछ समय बिताएं, पर उनकी रुचियां कुछ अलग थीं. अब वे तीनों ही बच्चे नहीं रह गए थे, धीरे-धीरे वे पुरुष बनते जा रहे थे. एक सुबह सुधा ने अपने पति से कहा, “मेरी ख़ुशी के लिए आप कुछ करेंगे?” पति ने कहा, “हां-हां क्यों नहीं? तुम कहो तो सही.” सुधा सहमते हुए बोली, “मैं एक बेटी गोद लेना चाहती हूं.” पति को आश्चर्य हुआ, पर सुधा ने कहा, “सवाल-जवाब मत करिएगा, प्लीज़.” तीनों बच्चों के सामने भी यह प्रस्ताव रख...
बंगाल सत्ता का रक्त चरित्र
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
आप तृणमूल के नही है तो सावधान बंगाल में आप सुरक्षित नही ?? #बंगाल_सत्ता_का_रक्त_चरित्र अमित शाह के हेलीकॉप्टर की एंट्री..."No" योगी के हेलीकॉप्टर की एंट्री..."No" CBI की एंट्री...."No" लोकतंत्र है या तालिबानी तंत्र...??? बांग्लादेशी और रोहिंग्याओ घुसपैठियों का दिल से स्वागत हैं।। ऐसी भी क्या मजबूरी थी की मुख्यमंत्री को स्वयं, भ्रष्टाचार के आरोपी को बचाने के लिए, उसके घर दौड़ कर आना पड़ा ? ये रिश्ता क्या कहलाता है ?? कोलकता की घटना पर कुछ तथ्य,कुछ निष्कर्ष:- 1.सीबीआई केंद्र सरकार के निर्देश पर नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शारदा चिटफंड घोटाले की जाँच कर रही है। 2.सीबीआई के बार-बार सम्मन दिए जाने के बावजूद पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार उपस्थित नहीं हो रहे थे सीबीआई उन्हें चार बार सम्मन दे चुकी थी। 3.सीबीआई पुलिस कमिश्नर से शारदा चिटफंड घोटाले पर केवल पूछताछ करने गई थी,गिरफ्तार करने नहीं। निष्कर्ष:- 1.आप किसी सरकारी अधिकारी को ड्यूटी करने से कैसे रोक सकते हैं? 2.एक मुख्यमंत्री भ्र्ष्टाचार में संलिप्त किसी अधिकारी को बचाने के लि...
सकारात्मक सोच
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
सकारात्मक सोच एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे। रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते,पर...केवल चड्डी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था। पास के बगीचे में शाम की सैर को आये बुजुर्ग उन बच्चों को खेलते हुए रोज देखते थे और अपने बचपन को याद कर उनके खेल का आनन्द लेते थे। एक दिन उस व्यक्ति ने गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर बड़े ही कौतुहल से पूछा.... "बेटे , तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन या कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?" अब जरा उस बच्चे का जवाब सुनिए "बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा....?इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ।" अपने ऑफिस से लौटते वक्त यदा कदा मैं भी उनके इस खेल को देखा करता था।जिस दिन वह बुजुर्ग गार्ड बनने वाले उस बच्चे से बात कर रहे थे...
राष्ट्रपिता / सिर्फ गांधी
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
राष्ट्रपिता / सिर्फ गांधी हे गांधी मुझको माफ करो, मै झूठ नहीं लिख पाउँगा। राष्ट्रपिता कहने से पहले, अपनी नजरों में गिर जाऊँगा।। माना आजादी के हवनकुंड में, तुमने भी था हव्य चढ़ाया। लाठी खायी जेल गए थे, सत्याग्रह उपवास कराया।। छलछंद खेल कर किसने, सुभाष का निष्कासन करवाया था? तुम नेहरू से नेह कर रहे, हमने योद्धा वीर गंवाया था।। भगत सिंह से क्रांतिपुत्र, क्यों तुमको बागी लगते थे? झूल गये फांसी के फंदे, क्यों तुमको दागी लगते थे?? जलियांवाला बाग़ की ज्वाला, समझा तुमने फ़ाग था जी। लगता है कि मन मंदिर में, बैठा जहरीला नाग था जी? भारत माता के टुकड़े तुमने, नेहरू हेतु करा डाला। और बहा घड़ियाली आँसू, सांपो को यहाँ बसा पाला।। भगवा तुम्हे खटकता था, और हरा हो गया प्यारा जी। बकरी बनी तुम्हारी माता, गाय विदेशी चारा जी।। पय पान कराती गाय यहाँ, बूचड़खाने में कट जाती है। गांधी तेरी अहिंसा आखिर, किस कोने में मर जाती है।। है आ गया जन्म दिन दोबारा, झूठे ढोल ढपोल बजेंगे। तकली से तलवार हराने के, कायर गीदड़ शोर मचेंगे।। चतुर गीदड़ों की कायरता, अहिंसा का झूठा मंत्र बनी। गीता के मंत्र पढ़े ...
भूलने वाली दवाई
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
"भूलने वाली दवाई " मोहन की दवा की दुकान थी और उसदिन दुकान पर काफी भीड़ थी वो ग्राहको को दवाई दे रहा था.. दुकान से थोड़ी दूर पेड़ के नीचे वो बुजुर्ग खड़े थे मोहन की निगाह दो तीन बार उन बुजुर्ग पर पड़ी तो गौर से देखा उनकी निगाह दुकान की तरफ ही थी मोहन ग्राहकों को दवाई देता रहा लेकिन उसके मन में उस बुजुर्ग के प्रति जिज्ञासा भी थी कि वो वहां खड़े खड़े क्या देख रहे है जब ग्राहक कुछ कम हुए तो मोहन ने दुकान का काउंटर दुकान में काम करने वाले लड़के के हवाले किया और उस बुजुर्ग के पास गया.. मोहन ने पूछा..क्या हुआ बाउजी जी कुछ चाहिए आपको.. मैं काफी देर से आपको यहां खड़े देख रहा हूं गर्मी भी काफी है इसलिए सोचा चलो मैं ही पूछ लेता हूं आपको क्या चाहिए... बुजुर्ग पहले इस सवालपर कुछ सकपका से गए फिर हिम्मत जुटा कर उसने पूछा...बेटा ..वो काफी दिन हो गए मेरे दो बेटे हैं दोनो दूसरे शहर में रहते है हरबार गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के साथ मिलने आ जाते हैं इसबार उन्होंने कहीं पहाड़ों पर छुट्टियां मनाने का निर्णय लिया है बेटा इसलिए इस बार वो हमारे पास नही आएंगे यह समाचार मुझे कल शाम को ही मिला.. कल स...
बेटी का अद्भुत प्यार माँ के लिए..
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
ठण्ड के दिन हैं। सब रजाई में दुबके हुए हैं । माँ रसोई में फिर भी कंपकंपाते हाथो से खाना बना रही है। उसकी बेटी मान्या ऑफिस से आने वाली है। घडी में 6 बजे का घंटा बजा है। माँ का हाथ और तेज़ी से चलने लगा। सब्जी गैस पे आटे से सने हाथों से एक हाथ से बाल हटाती रोटी बेल रही है। दरवाजे की घंटी बजी । घर के हिस्से में बेटे बहु रहते हैं । पर अनसुनी कर देते हैं । बेटा है नही ऑफिस में है । बहु हाथो में नेल पेंट लगा सूखा रही है। माँ गैस को स्लो कर दौड़ी दरवाजे की तरफ । बेटी के लिए दरवाजा खोलने । बेटी ने कहा माँ धीरे आया करो । गिर जाती तो लग जाती आपके। मैं इंतज़ार कर सकती हूँ । माँ का एक हाथ पकड़ दरवाज़े से अंदर लाती है। बेलन हाथ में से ले कहती है माँ क्या हालत बना ली है अपनी। मैं आकर कर लेती सब । माँ के बालों पे चिपका आटा हाथों से हटाती है। माँ आप बैठो मैं चाय बना के लाती हूँ । देखो गरमागर्म समोसे लायी हूँ । दो भाभी को भी देकर आती हूँ । भाभी एक ही घर में अलग रहती हैं अलग खाना बनाती हैं । माँ से बात नही करती हैं ।फिर भी मान्या बराबर उन्हें मानती है। चाय बना 2 कप में चाय लाती ...