बंगाल सत्ता का रक्त चरित्र


आप तृणमूल के नही है तो सावधान
बंगाल में आप सुरक्षित नही ??

#बंगाल_सत्ता_का_रक्त_चरित्र

अमित शाह के हेलीकॉप्टर की एंट्री..."No" योगी के हेलीकॉप्टर की एंट्री..."No" CBI की एंट्री...."No"
लोकतंत्र है या तालिबानी तंत्र...???
 बांग्लादेशी और रोहिंग्याओ घुसपैठियों का दिल से स्वागत हैं।।

ऐसी भी क्या मजबूरी थी की मुख्यमंत्री को स्वयं, भ्रष्टाचार के आरोपी को बचाने के लिए, उसके घर दौड़ कर आना पड़ा ?
ये रिश्ता क्या कहलाता है ??

कोलकता की घटना पर कुछ तथ्य,कुछ निष्कर्ष:-
1.सीबीआई केंद्र सरकार के निर्देश पर नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शारदा चिटफंड घोटाले की जाँच कर रही है।

2.सीबीआई के बार-बार सम्मन दिए जाने के बावजूद पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार उपस्थित नहीं हो रहे थे सीबीआई उन्हें चार बार सम्मन दे चुकी थी।

3.सीबीआई पुलिस कमिश्नर से शारदा चिटफंड घोटाले पर केवल पूछताछ करने गई थी,गिरफ्तार करने नहीं।
निष्कर्ष:-
1.आप किसी सरकारी अधिकारी को ड्यूटी करने से कैसे रोक सकते हैं?
2.एक मुख्यमंत्री भ्र्ष्टाचार में संलिप्त किसी अधिकारी को बचाने के लिए सारे पुलिस महकमे के साथ स्वयं कैसे पूरी ताक़त झोंक सकती हैं ?
3.ममता कोलकाता में जो कर रही हैं उस तर्क के आधार पर तो केंद्र सरकार को अपने सभी विरोधियों के दिल्ली आने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए क्या यह सही होगा?
4.यह देश की एकता-अखंडता एवं संघीय ढाँचे के लिए बड़ी चुनौती होगी उनकी देखा-देखी और भी राज्य-सरकारें अराजकता का रास्ता चुन सकती हैं और केंद्र सरकार के हर निर्णय को ग़लत बताकर मनमानी पर उतर सकती हैं।
5.कोई भ्रष्ट है या ईमानदार इसे न्याय-प्रक्रिया या वैधानिक तरीकों से तय किया जाएगा या किसी व्यक्ति विशेष के प्रमाण-पत्र के आधार पर ?

6.मोदी-विरोध में क्या आप इतनी अंधी हो जाएँगीं कि सारी संस्थाओं को ध्वस्त कर देंगीं, यह देश संविधान से चलेगा या आपकी मर्ज़ी से न खाता न बही,जो ममता कहें वह सही,यह कैसे संभव है ?

7.आपके तर्क के आधार पर तो हर आरोपी को यह अधिकार है कि वह जांचकर्ताओं को ही बंधक बना ले यदि पुलिस कमिश्नर और चुने हुए मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सही है तो आम आदमी  ग़लत कैसे?

दृष्टांत:- जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे,तब केंद्र की सारी एजेंसियाँ उनके विरुद्ध जाँच-पड़ताल कर रही थीं,क्या उन्होंने एक बार भी जाँच-एजेंसी के रास्ते में रोड़ा अटकाया या अपनी ताक़त का बेजा इस्तेमाल किया ?
जिन 23 दलों के नेता लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर कोलकाता में जुटे थे,क्या वे बताएँगे  कि क्या ये लोकतांत्रिक तरीका है ?आप ईमानदार हैं तो क्यों डर रही हैं?आपकी छटपटाहट बता रही है कि दाल में जरूर कुछ काला है।
मोदी हटाइए,लेकिन लोकतंत्र और संघीय ढाँचे का गला तो मत घोंटिए।

चोर को पकड़ने जाओ तो लोकतंत्र ख़तरे में हैं।
भ्रष्ट को हाथ लगाओ तो लोकतंत्र ख़तरे में हैं।
चुनाव में हार जाओ तो लोकतंत्र ख़तरे में हैं।
लोकतंत्र हैं जिंदाबाद, चोरतंत्र ख़तरे में हैं।

मेरा वोट प्रधानमंत्री "नरेन्द्र मोदी" जी को और आपका?
#लक्ष्य_हमारा_मोदी_दोबारा...

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