विद्यालय पर निबंध
विद्यालय पर निबंध ------------------------ "ये क्या लिख दिया बे ?" मंगरुआ सहमा हुआ, एक कोना में देवाल से चिपका जा रहा था, और फुलेसर मास्टर एक हाथ मे डंडा तो दूसरे हाथ मे मंगरुआ की काँपी लेकर उसकी ओर बढ़े आ रहे थे। मास्टर साहेब फिर चिचियाये - अबे बोलता काहे नहीं है? क्या एहि पढ़ाए थे हम्म ? मंगरुआ हिम्मत करके कहा - लेकिन माट साब आप स्कूल के जो लच्छण बताये थे, वो मुझे कभी नहीं दिखे , इसलिए जो दिखा ओही लिख दिया । का दिखा बे हरिश्चंदर की औलाद ? जो दिखेगा वही लिख देगा ? अब तुम से एगो निबंध लिखाने की खातिर स्कूलवा को मुगल गार्डन बना दें ? शान्ति प्रिय हेडमास्टर साहब ने शोरगुल सुना तो मनोहर कहानियां के नवीन संस्करण को कांख में दबाया और कक्षा में दाखिल होते ही पूछा - ई सब का है माट साब ? काहें शोर मचाये हैं ? फुलेसर गुरुजी डंडा को मंगरुआ के पेट में कोंचते हुए गरजे - इसी से पूछिए सर , देखिए विद्यालय पर क्या निबंध लिखा है इस बकलोल ने । हेड मास्टर साहब ने मंगरुआ की कॉपी पर नजर दौड़ाई , लिखा था .... मेरा विद्यालय गांव के बाहर मुर्गीबाड़े के बगल में स्थित है । मु...