संदेश

अनोखी दवाई

चित्र
#अनोखी_दवाई काफी समय से दादी की तबियत खराब थी .  घर पर ही दो नर्स उन की देखभाल करतीं थीं . डाक्टरों ने भी अपने हाथ उठा दिए थे और कहा था कि जो भी सेवा करनी है कर लीजिये . दवाइयां अपना काम नहीं कर रहीं हैं . . उसने घर में बच्चों को होस्टल से बुला लिया . काम के कारण दोनों मियां बीबी काम पर चले जाते . . दोनों बच्चे बार-बार अपनी दादी को देखने जाते . दादी ने आँखें खोलीं तो बच्चे दादी से लिपट गए . . 'दादी ! पापा कहते हैं कि आप बहुत अच्छा खाना बनाती हैं . हमें होस्टल का खाना अच्छा नहीं लगता . क्या आप हमारे लिए खाना बनाओगी ?' . नर्स ने बच्चों को डांटा और बाहर जाने को कहा . अचानक से दादी उठी और नर्स पर बरस पड़ीं . . 'आप जाओ यहाँ से . मेरे बच्चों को डांटने का हक़ किसने दिया है ? खबरदार अगर बच्चों को डांटने की कोशिश की !' . 'कमाल करती हो आप . आपके लिए ही तो हम बच्चों को मना  किया . बार-बार आता है तुमको देखने और डिस्टर्ब करता है . आराम भी नहीं करने देता .' . 'अरे ! इनको देखकर मेरी आँखों और दिल को कितना आराम मिलता है तू क्या जाने ! ऐसा कर मुझे जरा नहाना...

विद्यालय पर निबंध

विद्यालय पर निबंध ------------------------ "ये क्या लिख दिया बे ?" मंगरुआ सहमा हुआ, एक कोना  में देवाल से चिपका जा रहा था, और फुलेसर मास्टर एक हाथ मे डंडा तो दूसरे हाथ मे मंगरुआ की काँपी लेकर उसकी ओर बढ़े आ रहे थे। मास्टर साहेब फिर चिचियाये - अबे बोलता काहे नहीं है? क्या एहि पढ़ाए थे हम्म ? मंगरुआ हिम्मत करके कहा - लेकिन माट साब आप स्कूल के जो लच्छण बताये थे, वो मुझे कभी नहीं दिखे , इसलिए जो दिखा ओही लिख दिया । का दिखा बे हरिश्चंदर की औलाद ? जो दिखेगा वही लिख देगा ? अब तुम से एगो निबंध लिखाने की खातिर स्कूलवा को मुगल गार्डन बना दें ? शान्ति प्रिय हेडमास्टर साहब ने शोरगुल सुना तो मनोहर कहानियां के नवीन संस्करण को कांख में दबाया और कक्षा में दाखिल होते ही पूछा - ई सब का है माट साब ? काहें शोर मचाये हैं ? फुलेसर गुरुजी डंडा को मंगरुआ के पेट में कोंचते हुए गरजे - इसी से पूछिए सर , देखिए विद्यालय पर क्या निबंध लिखा है इस बकलोल ने । हेड मास्टर साहब ने मंगरुआ की कॉपी पर नजर दौड़ाई , लिखा था .... मेरा विद्यालय गांव के बाहर मुर्गीबाड़े के बगल में स्थित है । मु...

शुभ दिपावली

चित्र
अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा। हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं बार-बार बस गिनते जाते है चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं .... धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं चल...

अच्छे लोग, अच्छी सोंच....

जब डॉक्टर ने ये बताया था ना , बधाई हो बेटी हुई है । मैंने लड्डू बांट दिए थे पूरे अस्पताल में क्योंकि मुझे शिखा ( पत्नी) जैसी बेटी ही चाहिए थी ।जब चलती थी ना  तो उसके छोटे छोटे पैरों की  पायल की गूंज पूरे घर में दौड़ जाती थी ।मुझे याद है उसने पहली बार जब पापा बोला था। कितना खुश था मैं । मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया  घंटों में उससे बोलता रहा , बेटा पापा बोलो , पा.....पा ,पा......पा और वो गर्दन मटकाने लगती । मैं उसकी हर नादानी पर बहुत हंसता । जब वो पांचवी में थी उसने पापा के ऊपर निबंध लिखा । उसने लिखा मेरे पापा हीरो है ।जो उसने अपने शब्दों में लिखा था , दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है जो पापा मेरे लिए नहीं ला सकते और ऐसा कोई काम नहीं जिसे पापा नहीं कर सकते । मेरे पापा अलादीन के चिराग हैं ।मैंने न जाने कितनी बार उस निबंध को पढ़ा । जब भी मैं उसे पढ़ता तो मुझे एक सफल पिता की झलक उसमें दिखती अपनी मां की चुन्नी ओढ़कर अक्सर मुझे खाना बनाकर खिलाती ।  धीरे धीरे मेरी  प्लास्टिक की गुड़िया दादी अम्मा बन गई  ।मैं उसमें अपनी मां की छवि देखता  ।हर बात पर मुझे ...

CBI

चित्र
In the best of my knowledge.... Why did Modi remove the CBI head who was about to start an investigation in the Rafale deal? As per the law, CBI cannot investigate anything unless the Central Government notifies that case.[As per the Act CBI can investigate only with notification by the Central Government] So how was Alok Verma going to investigate a case which was not even notified by the government? Further, if we assume Alok Verma was going to do it on his own then a question arises how come it come in public domain? A CBI officer’s utmost responsibility is secrecy and so he being the Director failed to maintain integrity and secrecy. Next question is on whose complaint was he to start an investigation? Prashant Bhushan, Arun Shourie, and Yashwant Sinha had been meeting Alok Verma of late in private. So a CBI chief starts an investigation on mere hearsay of a private individual when even SC has decided not to go into Rafale’s price and technical details. So if a...

कीचड़

चित्र
" कीचड़ "    कहानी पढ़ने के बाद रूह काँप जाएगी..!! उसे नारी देह बहुत पसंद थी, वह भी बिना कपड़ों के हर दिन उसे खेलने के लिए एक नया गोश्त चाहिए था, आज भी वह गोश्त की दुकान की सीढ़ियां चढ़ रहा था। रोज की तरह कई जिस्म देखे फिर एक सबसे कम उम्र की देह उसे पसंद आई। उम्र उसकी कम थी पर हाव भाव से और इशारों से वह काफी समझदार लग रही थी वह उसे लेकर कमरे की तरफ चल दिया, पेमेंट पहले ही कर दी थी। कमरा भी ऐशो-आराम वाला था क्योंकि उसके पास पैसों की कमी नहीं थी। वह लड़की से बोला - "तुम्हें आज पहली बार देख रहा हूं.." "हां साहब कल ही मेरा सेठ मुझे यहां लाया है, अब देर मत करो साहब दिन में 10 कस्टमरों का कोटा पूरा करना है" यह कहकर उसने अपने शरीर से दीवार बन रहे कपड़ों को अलग कर दिया वह किसी भूखे कुत्ते की तरह झपट पड़ा जैसे उसकी आत्मा वासना के गंदे सागर में मिलने के लिए बेताब थी, थोड़ी देर में उसने अपनी मृगतृष्णा शांत कर ली थी। जब उसकी आंखों से वासना का खुमार कम हुआ तो कमरे में भी नजर दौड़ाई पलंग के बराबर टेबल पर एक फोटो देखते ही उसके पैरों से जमीन खिसक गई, वह...

माँ

चित्र
#डीआईजी_नवनीत_सिकेरा_जी ने एक बेहद मार्मिक स्टोरी पोस्ट की। एक जज अपनी पत्नी को क्यों दे रहे हैं तलाक???। ""रोंगटे खड़े"" कर देने वाली सच्ची घटना। कल रात एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मेरी ज़िन्दगी के कई पहलुओं को छू लिया. करीब 7 बजे होंगे, शाम को मोबाइल बजा । उठाया तो उधर से रोने की आवाज... मैंने शांत कराया और पूछा कि भाभीजी आखिर हुआ क्या? उधर से आवाज़ आई.. आप कहाँ हैं??? और कितनी देर में आ सकते हैं? मैंने कहा:- "आप परेशानी बताइये"। और "भाई साहब कहाँ हैं...?माताजी किधर हैं..?" "आखिर हुआ क्या...?" लेकिन उधर से केवल एक रट कि "आप आ जाइए", मैंने आश्वाशन दिया कि कम से कम एक घंटा पहुंचने में लगेगा. जैसे तैसे पूरी घबड़ाहट में पहुँचा; देखा तो भाई साहब [हमारे मित्र जो जज हैं] सामने बैठे हुए हैं; भाभीजी रोना चीखना कर रही हैं 12 साल का बेटा भी परेशान है; 9 साल की बेटी भी कुछ नहीं कह पा रही है। मैंने भाई साहब से पूछा कि ""आखिर क्या बात है""*??? ""भाई साहब कोई जवाब नहीं दे रहे थे ""....