लाडली

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शोकेस में रखी माँ की तस्वीर के साथ अब पिताजी की तस्वीर भी रख दी गई थी, उस पर भी फूल माला चढी हुई और सामने अगरबत्ती जल रही थी। कनिका सामने अपने बेड पर बैठी एकटक पिताजी के उस चित्र को देख रही थी।
पिछले बीस दिनों में मानो उसकी ज़िन्दगी का चक्र ही स्थिर हो गया था, कई वर्ष पहले माँ के स्वर्गवास के बाद से ही पिताजी ने उसकी तथा भैया कपिल की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी। दोनों की सारी आवश्यकताएं ऑफिस जाने के साथ यथासमय पूरी करना ही उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य हो गया था। कपिल तो लड़का था पर कनिका को भी कभी माँ की कमी महसूस नहीं होने दी पिताजी ने। कनिका यूँ तो हर तरह से सुखी संतुष्ट थी परन्तु कपिल का व्यवहार अक्सर उसे उदास कर देता था, हर बात में वह स्वयं को कनिका से श्रेष्ठ मानता था, अपने से 2 साल बड़े भाई से जैसे दोस्ताना व्यवहार की अपेक्षा किसी भी बहन को हो सकती थी वैसा कनिका को कपिल से कभी नहीं मिलता था। एक दिन तो तब हद ही हो गईं थी जब किसी बात पर होने वाली बहस बढ़ते बढ़ते शिकायत के रूप में पिताजी तक पहुँच गई, जब उन्होंने दोनों को समझाया तो कनिका तुरंत मान गई पर कपिल अपनी बात पर अड़ा रहा। उसका सीधा सा तर्क था, कि पिताजी के बाद वो ही इस घर का मालिक है अतः वो जो कह रहा है वो कनिका को मान लेना चाहिये, वैसे भी कनिका इस घर में कुछ समय की मेहमान है, एक दिन तो उसे अपने ससुराल चले ही जाना है फिर वो किस हक़ से अपना रौब जमाती है l ऐसी घटनाएं फिर आए दिन होने लगीं, पिताजी समझाने की बहुत कोशिश करते पर नतीजा कुछ न निकलता।
4 महीने पहले कपिल की शादी उसकी पसंद की लड़की से होने के बाद तो स्थिति और ख़राब हो गई थी, कहाँ तो कनिका भाभी के रूप में सहेली की अपेक्षा कर रही थी और कहाँ उसकी भाभी कपिल की ही हाँ में हाँ मिलाने लगीं थी। और अब 20 दिन पहले पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद तो कनिका एकदम टूट गयी थी, जिस सत्ता का सुख वो सुरक्षित रह कर भोग रही थी उस सत्ता का भी परिवर्तन..............l सोचते सोचते उसकी आँख भर आई और तभी दरवाज़े की घंटी बज उठी, अपने विचारों के जाल से निकल उसने दरवाज़ा खोला तो कुछ देर पहले बाहर गया हुआ कपिल पत्नी के साथ अन्दर आया, उसकी ओर देख कर बोला, “यहाँ, मेरे पास आ कन्नी, सुन, जब तू पैदा हुई थी तब से ही पिताजी तेरी शादी के लिए पैसे जोड़ रहे थे, पहले जॉइंट अकाउंट माँ के साथ था, फिर मेरे साथ। उसमे जमा 42 लाख रुपये मैंने तेरे अकाउंट में डाल दिए हैं, तूने पिताजी को शिखर के बारे में बताया था, वो भी उन्होंने मुझे बता दिया है, मैंने शिखर को देखा है, मुझे पसंद भी है, अभी हम उसके घर से ही आ रहे है, उसके माँ-पिताजी से बात कर के हमने तेरा रिश्ता वहाँ तय कर दिया है, पिताजी की ही तरह तू हमारी भी लाडली है.... पगली, पिताजी के बाद तुझे अब माँ और पिता दोनों मिल गए हैं”

कनिका आँखों में आँसू लिए कपिल की ओर देखती रह गई, कपिल ने आगे बढ़ कर उसे गले लगा लिया और उसका माथा चूम लिया वो भी कपिल के गले लगते हुए सोचने लगी कि वो व्यर्थ ही इस सत्ता परिवर्तन से दुखी थी। उसके मुँह से केवल एक शब्द निकला, “भैया....” और बाकी सब आँसूओं में बह गया।

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