बेटी का अद्भुत प्यार माँ के लिए..
ठण्ड के दिन हैं। सब रजाई में दुबके हुए हैं । माँ रसोई में फिर भी कंपकंपाते हाथो से खाना बना रही है। उसकी बेटी मान्या ऑफिस से आने वाली है। घडी में 6 बजे का घंटा बजा है। माँ का हाथ और तेज़ी से चलने लगा। सब्जी गैस पे आटे से सने हाथों से एक हाथ से बाल हटाती रोटी बेल रही है। दरवाजे की घंटी बजी । घर के हिस्से में बेटे बहु रहते हैं । पर अनसुनी कर देते हैं । बेटा है नही ऑफिस में है । बहु हाथो में नेल पेंट लगा सूखा रही है। माँ गैस को स्लो कर दौड़ी दरवाजे की तरफ । बेटी के लिए दरवाजा खोलने । बेटी ने कहा माँ धीरे आया करो । गिर जाती तो लग जाती आपके। मैं इंतज़ार कर सकती हूँ । माँ का एक हाथ पकड़ दरवाज़े से अंदर लाती है। बेलन हाथ में से ले कहती है माँ क्या हालत बना ली है अपनी। मैं आकर कर लेती सब । माँ के बालों पे चिपका आटा हाथों से हटाती है। माँ आप बैठो मैं चाय बना के लाती हूँ । देखो गरमागर्म समोसे लायी हूँ । दो भाभी को भी देकर आती हूँ । भाभी एक ही घर में अलग रहती हैं अलग खाना बनाती हैं । माँ से बात नही करती हैं ।फिर भी मान्या बराबर उन्हें मानती है। चाय बना 2 कप में चाय लाती ...