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नकारा पति...

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कल आपको कहा था ना, आते वक्त बनारसी साड़ी ले आइयेगा, वो शर्मा जी की बीबी जैसें पहनती हैं 15 हजार वाली, तो क्यू नही लाया? मेरी तनख्वाह उतनी नही हैं मैं कहा से लाता, दशहरा में बोनस मिलेगा तो मैं दिलवा दूंगा, अभी फिलहाल में नही ला सकता........... सुमन गुस्सें से, कैंसा नकारा पति मिला हैं, शर्मा जी को देख लो, कैसें अपनी बीवी की सारी ख्वाहिश पूरी करतें हैं, उनकी हर जरूरत पूरी करते हैं मेरी तो जिंदगी तबाह हो गयी तुमसे शादी कर के, पता नही कौन से मनहूस घड़ी में मेरे पापा ने तुम जैसें भिखारी से बाँध दिया..........         चलिए अब सुमन और उसके पति के बारें में जानते हैं, सुमन एक पढ़ी लिखी और थोड़ा पैसे वाले घर की लड़की थी, रमेश उसका पति एक दफ्तर में बाबू था, सुमन के पापा ने अपनी बिमारी के चलते जल्दी में रमेश से शादी करवा दी, सुमन बहुत ही खर्चीली और हठी महिला थी, उसे बस अपने शौक, जरूरत ही दिखती थी, और रमेश उसके विपरीत बहुत ही सभ्य और सुलझा हुआ व्यक्ति था, आये दिन सुमन, रमेश को अपनी जरूरतों के लिए, अपने शौक के लिए ताने मारती और रमेश बस चुप रहता कुछ नही कहता, अच्...
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नालायक बेटा

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नालायक_बेटा........ "बेटा , हमारा एक्सीडेंट हो गया है ।मुझे ज्यादा चोट नहीं  आई पर तेरी माँ की हालत  गंभीर है।कछ पैसों की जरुरत है और तेरी माँ को खुन भी देना है।"बासठ साल के माधव जी ने अपने बडे बेटे से फोन पर कहा। "पापा, मैं बहुत व्यस्त हूँ आजकल।मेरा आना नही हो सकेगा।मुझे विदेश मे नौकरी का पैकेज मिला है तो उसी की तैयारी कर रहा हूँ।आपका भी तो यही सपना था ना? इसलिये हाथ भी तंग चल रहा है।पैसे की व्यवस्था कर लीजिए मैं बाद मे दे दुँगा।"उनके बडे इंजिनियर बेटे ने जबाब दिया। उन्होनें अपने दुसरे डाॅक्टर बेटे को फोन किया तो उसने भी आने से मना कर दिया । उसे अपनी ससुराल मे शादी मे जाना था। हाँ इतना जरुर कहा कि पैसों की चिंता मत कीजिए मै भिजवा दूँगा। यह अलग बात है कि उसने कभी पैसे नहीं भिजवाए। उन्होंने बहुत मायुसी से फोन रख दिया।अब उस नालालक को फोन करके क्या फायदा। जब ये दो लायक बेटे कुछ नही कर रहे तो वो नालायक क्या कर  लेगा? उन्होंने सोचा और बोझिल कदमों से अस्पताल मे पत्नी के पास पहूँचे और कुरसी पर ढेर हो गये।पुरानी बातें याद आने लगी। ------------------- माधव रा...

राज्य और राजा

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एक राज्य में एक रिवाज था. राज्य  में राजा की नियुक्ति सिर्फ पांच साल के लिए ही होती थी. राजा के गद्दी संभालने के पांच साल बाद नए राजा का चुनाव होता था. पुराने राजा को राज्य की नदी के उस पार जंगल में भेज दिया जाता. नए राजा का दिल से स्वागत-सत्कार किया जाता और दूसरे को जंगल में विदा कर दिया जाता. पुराना राजा जंगल में दो-चार दिन डरा-डरा सा, सहमा हुआ घूमता. बाद में किसी जंगली जानवर का शिकार हो जाता. गांव में नए राजा की नियुक्ति की भी अजीब प्रथा थी. गांव के सभी लोग उस दिन इक्कठ्ठे होते और हाथी की सूंड में फूलों का हार थमा देते. हाथी जिसे उस हार को पहनाता वो शख्स अगले पांच साल तक जंगल का राजा चुन लिया जाता. पद मिलने के बाद राजा बना शख्स फूला नहीं समाता और अगले पांच साल तक जमकर भोग-विलास करता. इतनी भव्यता और ऐश-ओ-आराम के बाद जब पांच साल बाद उसे जंगल जाने के लिए भेजा जाता तो वो जाने के लिए तैयार नहीं होता. लेकिन परंपरा के मुताबिक उसे जबरदस्ती रस्सी से बांधकर, घसीटकर, मार-पीटकर खुंखार जानवरों से भरे जंगल में छोड़ दिया जाता. सालों से चली आ रही इस परंपरा के मुताबिक एक राजा का पांच...

मंदसौर बलात्कार काँड

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मंदसौर बलात्कार काँड पर गगनभेदी सेकुलर चुप्पी क्यो? मध्य प्रदेश का मंदसौर जल रहा है, लेकिन राहुल गांधी नदारद हैं। मंदसौर के लोग हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर हैं, लेकिन मीडिया मौन है। तथाकथित बुद्धिजीवियों और सेक्यूलरवादियों की जुबानों पर ताले लगे हैं। बॉलीवुड के सेक्यूलरों को भी आज हिंदुस्तानी होने पर शर्म नहीं आ रही है। लेखक शायर की कलम जम गई। जानते हैं क्यों? क्योंकि वहां एक 7 साल की हिंदू बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है और रेप करने वाला एक मुसलमान है। इस तरह की बातें आपको हैरत में जरूर डालती होंगी। आप सोचते होंगे कि यह तो अपराध है, इसमें हिंदू-मुस्लिम क्यों? दरअसल ये सीमा रेखा हमने नहीं बल्कि कांग्रेसी, वामपंथी और तथाकथित सेक्यूलरवादियों ने खींची हैं। आरोप है कि इरफान नाम के दरिंदे ने बच्ची का रेप उसे काफिर… यानि दूसरे धर्म का समझकर किया था। मोहम्मद इरफान ने 7 साल की बच्ची को उठाया और उसका रेप किया, उसे मारने की कोशिश की, जब उसे लगा कि बच्ची मर गई है तो इसने उसे झाड़ियों में फेंक दिया और भाग गया। भागने से पहले उसने बच्ची की गुप्तांग दांतों से काटा, उसकी अंतड़ियां नि...

रिस्ता

एक मित्र ने भेजा था पसंद आया तो आप सब के बीच रख रहा हुं थोड़ा समय लगेगा लेकिन पढ़ना जरूर, आंसू आ जाए तो जान लेना आपकी भावनाएं जीवित हैं .... बात बहुत पुरानी है। आठ-दस साल पहले की है  ।  मैं अपने एक मित्र का पासपोर्ट बनवाने के लिए दिल्ली के पासपोर्ट ऑफिस गया था। उन दिनों इंटरनेट पर फार्म भरने की सुविधा नहीं थी। पासपोर्ट दफ्तर में दलालों का बोलबाला था और खुलेआम दलाल पैसे लेकर पासपोर्ट के फार्म बेचने से लेकर उसे भरवाने, जमा करवाने और पासपोर्ट बनवाने का काम करते थे। मेरे मित्र को किसी कारण से पासपोर्ट की जल्दी थी, लेकिन दलालों के दलदल में फंसना नहीं चाहते थे। हम पासपोर्ट दफ्तर पहुंच गए, लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म भी ले लिया। पूरा फार्म भर लिया। इस चक्कर में कई घंटे निकल चुके थे, और अब हमें िकसी तरह पासपोर्ट की फीस जमा करानी थी। हम लाइन में खड़े हुए लेकिन जैसे ही हमारा नंबर आया बाबू ने खिड़की बंद कर दी और कहा कि समय खत्म हो चुका है अब कल आइएगा। मैंने उससे मिन्नतें की, उससे कहा कि आज पूरा दिन हमने खर्च किया है और बस अब केवल फीस जमा कराने की बात रह गई...

भारत

ईसा की सातवीं शताब्दी में तथा पड़ोसी देशों से जो बर्बर गिरोह भारत मे आने शुरू हुए थे, तब से लेकर आज तक का इतिहास का अध्ययन दोषपूर्ण ही रहा है । मध्ययुग के भारत के इतिहास को अगर आप पढ़ेंगे, जिसमे लोलुप अंधविश्वासी अरब इस्लाम का प्रचार करने के बहाने धरती को रौंदते ओर खून की नदियां बहाते हुए चारो ओर बिखर रहे थे, तो आपकी रूह कांप उठेगी !! यह आवारा खानाबदोश नैतिकता से हीन मुसलमान हर जगह गए, हर घर मे घुसे, इनके एक हाथ मे खून से भीगी तलवार थी, तो दूसरे हाथ मे जलती मशाल, यह व्यक्तियों को काटते थे, तो दूसरी ओर चीखती चिल्लाती महिलाओ को अपने हरम में बलात्कार के लिए घसीटते थे । इस्लाम किसी भी जाति या धर्म का ऐसा धर्म का ऐसा कलंक रूप है, जो शैतान की कलिमा को भी मात देता है । हमारा भारत भी उन देशों में था, जो बुरी तरह जले झुलसे थे, चीरे फाड़े गए थे, कुचले मसले गए थे, पंगु ओर अपंग बने थे, बंदी ओर कैदी बनाये गए थे ! यह खूंखार इस्लामिक आक्रमणकारी सागर की तरंगों के भांति लगातार आ रहे थे । इसी खूनी गिरोह का एक कुख्यात सरदार था, हरी आंखों वाला 18 साल का मुहम्मद बिन कासिम !  यह अर्धचंद्र अंकित इस...