लाडली
------ #लाडली ----- शोकेस में रखी माँ की तस्वीर के साथ अब पिताजी की तस्वीर भी रख दी गई थी, उस पर भी फूल माला चढी हुई और सामने अगरबत्ती जल रही थी। कनिका सामने अपने बेड पर बैठी एकटक पिताजी के उस चित्र को देख रही थी। पिछले बीस दिनों में मानो उसकी ज़िन्दगी का चक्र ही स्थिर हो गया था, कई वर्ष पहले माँ के स्वर्गवास के बाद से ही पिताजी ने उसकी तथा भैया कपिल की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी। दोनों की सारी आवश्यकताएं ऑफिस जाने के साथ यथासमय पूरी करना ही उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य हो गया था। कपिल तो लड़का था पर कनिका को भी कभी माँ की कमी महसूस नहीं होने दी पिताजी ने। कनिका यूँ तो हर तरह से सुखी संतुष्ट थी परन्तु कपिल का व्यवहार अक्सर उसे उदास कर देता था, हर बात में वह स्वयं को कनिका से श्रेष्ठ मानता था, अपने से 2 साल बड़े भाई से जैसे दोस्ताना व्यवहार की अपेक्षा किसी भी बहन को हो सकती थी वैसा कनिका को कपिल से कभी नहीं मिलता था। एक दिन तो तब हद ही हो गईं थी जब किसी बात पर होने वाली बहस बढ़ते बढ़ते शिकायत के रूप में पिताजी तक पहुँच गई, जब उन्होंने दोनों को समझाया तो कनिका तुरंत मान गई पर कप...